Sep 28, 2026

जीतें तो पुरुषार्थ, हारें तो चुनाव आयोग दोषी: विपक्ष पर बरसे सीएम योगी, संवैधानिक संस्थाओं के अपमान पर माफी की मांग

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को राजधानी लखनऊ में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान विपक्षी दलों, खासकर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी (सपा) और राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) पर तीखा हमला बोला। सीएम योगी ने विपक्ष की बयानबाजी और कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दल अपने संकीर्ण राजनीतिक हितों के लिए देश की संवैधानिक संस्थाओं को नुकसान पहुंचाने और लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करने का काम कर रहे हैं।

उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले एसआईआर यानी विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। रविवार को राजधानी लखनऊ में प्रेस वार्ता के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और राजद समेत विपक्षी दलों के रुख पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक हितों के लिए संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बनाया जा रहा है और इससे लोकतांत्रिक संस्थाओं पर जनता के भरोसे को प्रभावित करने की स्थिति बन सकती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्षी दल चुनाव जीतने पर उसका श्रेय अपने राजनीतिक कौशल को देते हैं, लेकिन चुनाव परिणाम अनुकूल नहीं रहने पर निर्वाचन आयोग और ईवीएम पर सवाल खड़े करते हैं। उन्होंने इसी संदर्भ में कहा कि चुनाव में जीत को अपना पुरुषार्थ और हार को आयोग की गलती बताने की राजनीति पर आत्ममंथन होना चाहिए। योगी ने विपक्षी दलों से अपने बयानों और गतिविधियों पर नियंत्रण रखने तथा संवैधानिक संस्थाओं के प्रति जिम्मेदार रवैया अपनाने की अपील की। एसआईआर के विरोध को लेकर योगी आदित्यनाथ ने कहा कि मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण की प्रक्रिया देश में पहले भी कई बार हो चुकी है। उन्होंने 1952, 1957, 1961, 1965-66 और 2003 में हुए ऐसे पुनरीक्षणों का उल्लेख किया। उनके अनुसार वर्तमान एसआईआर को लेकर कांग्रेस, सपा और राजद की ओर से जिस तरह सवाल उठाए जा रहे हैं, वह उचित नहीं है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि निर्वाचन आयोग की ओर से एसआईआर की प्रक्रिया, फॉर्म-6 और छूटे हुए मतदाताओं से जुड़े प्रावधानों पर स्पष्टीकरण दिया जा चुका है। उन्होंने कहा कि तीनों चुनाव आयुक्तों के सार्वजनिक रूप से स्थिति स्पष्ट करने के बावजूद आयोग पर सवाल उठाना उचित नहीं है। योगी ने कांग्रेस पर निर्वाचन आयोग के अलावा अन्य संवैधानिक संस्थाओं को लेकर भी सवाल उठाने का आरोप लगाया। उन्होंने ईवीएम को लेकर कांग्रेस के पूर्व में दिए गए बयानों का जिक्र करते हुए कहा कि जिस व्यवस्था के जरिए कांग्रेस ने केंद्र और विभिन्न राज्यों में चुनाव जीते, उसी पर सवाल उठाना विरोधाभासी है। उन्होंने राहुल गांधी की ओर से न्यायपालिका पर उठाए गए सवालों, राफेल मामले में कैग को लेकर कांग्रेस के रुख और चुनावी मशीनरी पर लगाए जाने वाले आरोपों का भी जिक्र किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर लगातार सवाल उठाने के बजाय राजनीतिक दलों को आत्ममंथन करना चाहिए। प्रेस वार्ता में मुख्यमंत्री ने 25 जून 1975 के आपातकाल का भी उल्लेख किया। उन्होंने कांग्रेस पर उस दौर में लोकतांत्रिक संस्थाओं और निर्वाचित सरकारों के साथ अनुचित व्यवहार करने का आरोप लगाया। इसके अलावा उन्होंने बालाकोट एयरस्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर को लेकर विपक्ष की ओर से उठाए गए सवालों का भी जिक्र किया और कहा कि सेना की कार्रवाई पर राजनीतिक विवाद खड़ा करने से बचना चाहिए। मुख्यमंत्री ने अंत में कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों से अपने कथित गैर-जिम्मेदाराना रवैये के लिए संवैधानिक संस्थाओं और नागरिकों से माफी मांगने की मांग की। वहीं, एसआईआर को लेकर कांग्रेस लगातार निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली और प्रक्रिया में पारदर्शिता पर सवाल उठा रही है। उत्तर प्रदेश कांग्रेस ने हाल में एसआईआर और आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर अधिक सार्वजनिक जानकारी की मांग की थी।