Sep 28, 2026

स्मार्ट पुलिसिंग की ओर यूपी का कदम: अब पदों और जिम्मेदारियों के हिसाब से तैयार होंगे स्पेशल ट्रेनिंग कोर्स,आईजीओटी पोर्टल पर होंगे अपलोड

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश पुलिस को और अधिक दक्ष, पेशेवर और आधुनिक बनाने के उद्देश्य से शासन ने एक बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। अब राज्य में पुलिसकर्मियों को उनके पद और विशिष्ट जिम्मेदारियों के अनुसार विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके लिए प्रत्येक पद के अनुरूप अलग से प्रशिक्षण पाठ्यक्रम (ट्रेनिंग कोर्स) तैयार करने की कार्ययोजना बनाई गई है। इन सभी डिजिटल पाठ्यक्रमों को केंद्र सरकार के एकीकृत सरकारी ऑनलाइन प्रशिक्षण यानी 'आईजीओटी' पोर्टल पर उपलब्ध कराया जाएगा।

उत्तर प्रदेश पुलिस में अब पुलिसकर्मियों को उनकी जिम्मेदारियों और पद के अनुरूप प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके लिए अलग-अलग पदों की कार्यप्रकृति को ध्यान में रखते हुए विशेष प्रशिक्षण पाठ्यक्रम तैयार किए जाएंगे। इन पाठ्यक्रमों को केंद्र सरकार के एकीकृत सरकारी ऑनलाइन प्रशिक्षण यानी आईजीओटी पोर्टल पर उपलब्ध कराया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया के लिए प्रशिक्षण निदेशालय को नोडल एजेंसी बनाया गया है। प्रशिक्षण निदेशालय ने इस संबंध में पुलिस की संबंधित इकाइयों और अधिकारियों को दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसका उद्देश्य पुलिसकर्मियों को उनकी जिम्मेदारियों के अनुरूप आवश्यक ज्ञान और कौशल से प्रशिक्षित करना है, ताकि वे अपने पद से जुड़े कार्यों को अधिक प्रभावी ढंग से पूरा कर सकें। निर्देशों के मुताबिक यदि कोई कमिश्नरेट, जोन, रेंज या राज्य स्तरीय पुलिस इकाई किसी विशेष विषय पर प्रशिक्षण पाठ्यक्रम तैयार करना चाहती है तो उसे संबंधित प्रभारी अधिकारी के माध्यम से प्रशिक्षण निदेशालय को प्रस्ताव भेजना होगा। प्रस्ताव में पाठ्यक्रम का विषय, उसका संक्षिप्त विवरण और संबंधित पद के लिए उसकी उपयोगिता स्पष्ट करनी होगी। प्रशिक्षण पाठ्यक्रम तैयार करने से पहले प्रशिक्षण निदेशालय से लिखित अनुमति लेना अनिवार्य होगा। इसके बाद ही संबंधित विषय पर प्रशिक्षण सामग्री तैयार की जा सकेगी। प्रशिक्षण पाठ्यक्रम की अवधि न्यूनतम 20 मिनट और अधिकतम 60 मिनट रखने के निर्देश दिए गए हैं। पाठ्यक्रम की सामग्री तैयार करने के लिए विषय विशेषज्ञों की मदद ली जाएगी। सबसे पहले प्रस्तुतीकरण तैयार होगा। उसकी गुणवत्ता की समीक्षा के बाद प्रत्येक स्लाइड के लिए बोलने की सामग्री तैयार की जाएगी। प्रशिक्षण सामग्री में तथ्यात्मक या कानूनी गलती न हो, इसका विशेष ध्यान रखने को कहा गया है। पुलिसकर्मियों के लिए तैयार होने वाले पाठ्यक्रम मुख्य रूप से हिंदी में होंगे। हालांकि जरूरत के अनुसार प्रचलित और सरल अंग्रेजी शब्दों का इस्तेमाल किया जा सकेगा। पाठ्यक्रम को अधिक प्रभावी बनाने के लिए आवश्यकता के अनुसार फोटो और वीडियो का भी इस्तेमाल किया जा सकेगा। प्रत्येक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम के अंत में कम से कम 10 बहुविकल्पीय प्रश्न शामिल किए जाएंगे। इससे प्रशिक्षण लेने वाले पुलिसकर्मियों की विषय को लेकर समझ का आकलन किया जा सकेगा।प्रशिक्षण निदेशालय और संबंधित पुलिस इकाई संयुक्त रूप से तैयार सामग्री की समीक्षा करेंगे। समीक्षा के बाद संशोधित सामग्री के आधार पर प्रशिक्षण वीडियो तैयार कराया जाएगा। संबंधित अधिकारी की मंजूरी मिलने के बाद ही अंतिम पाठ्यक्रम को आईजीओटी पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। नई व्यवस्था के तहत प्रशिक्षण को केवल सामान्य पाठ्यक्रम तक सीमित रखने के बजाय पुलिसकर्मियों की वास्तविक जिम्मेदारियों और पद के अनुरूप तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है। इससे अलग-अलग स्तर पर कार्यरत पुलिसकर्मियों को उनके काम से सीधे जुड़े विषयों पर ऑनलाइन प्रशिक्षण उपलब्ध कराने की व्यवस्था विकसित होगी।