Sep 28, 2026

‘गोलियां चलीं, लेकिन अशोक सिंघल शेर की तरह डटे रहे’, जन्म शताब्दी समारोह में योगी ने याद किया राम मंदिर आंदोलन का दौर

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लखनऊ। विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के पूर्व अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष स्वर्गीय अशोक सिंघल के जन्म शताब्दी वर्ष के अवसर पर लखनऊ के सिटी मांटेसरी स्कूल ऑडिटोरियम में भव्य उद्घाटन समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में गोरक्ष पीठाधीश्वर व उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। सीएम योगी के मंच पर पहुंचते ही पूरा सभागार 'जय श्रीराम' के गगनभेदी नारों से गूंज उठा।

विश्व हिंदू परिषद के तत्वावधान में लखनऊ के सिटी मांटेसरी स्कूल ऑडिटोरियम में राम जन्मभूमि आंदोलन के प्रमुख चेहरों में रहे स्वर्गीय अशोक सिंघल के जन्म शताब्दी वर्ष का उद्घाटन समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरक्षपीठाधीश्वर के रूप में मुख्य अतिथि के तौर पर हिस्सा लिया। उनके मंच पर पहुंचते ही सभागार में ‘जय श्रीराम’ के नारे गूंजने लगे। समारोह को संबोधित करते हुए योगी आदित्यनाथ ने राम जन्मभूमि आंदोलन के दौर को याद किया। उन्होंने कहा कि दो नवंबर 1990 को अयोध्या में राम नाम का जाप कर रहे कारसेवकों पर लाठीचार्ज और गोलीबारी हुई थी। योगी ने कहा कि उस समय अशोक सिंघल कार्यकर्ताओं के बीच नेतृत्व और उत्साह के साथ खड़े रहे। उन्होंने सिंघल के नेतृत्व और संगठनात्मक भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि आंदोलन से जुड़े लोगों को उस दौर में नेतृत्व की आवश्यकता थी, जिसे अशोक सिंघल ने प्रदान किया। योगी ने कहा कि राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान बड़ी संख्या में लोग संघर्ष के लिए तैयार थे और अशोक सिंघल ने उन्हें संगठित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि सिंघल का जीवन सामाजिक और सांस्कृतिक मुद्दों से जुड़ी गतिविधियों के लिए समर्पित रहा। मुख्यमंत्री ने कहा कि अशोक सिंघल ने शिक्षा और सेवा के क्षेत्र में भी काम किया। उनके अनुसार जनजातीय क्षेत्रों में एकल विद्यालयों की स्थापना और विस्तार के माध्यम से बच्चों तक शिक्षा पहुंचाने का प्रयास किया गया। उन्होंने कहा कि ऐसे विद्यालयों में आदिवासी समुदाय के बच्चों को शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। योगी ने गोसेवा और गोसंरक्षण से जुड़े कार्यों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अशोक सिंघल के सान्निध्य में सीखे गए गोसेवा के कार्यों को आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि 2017 के बाद उत्तर प्रदेश में हजारों गोशालाएं बनाई गई हैं और बड़ी संख्या में गोवंश के संरक्षण की व्यवस्था की गई है। उन्होंने कहा कि गोसंरक्षण केवल भाषण या सड़क पर आंदोलन का विषय नहीं होना चाहिए, बल्कि इसके लिए व्यवहारिक स्तर पर काम किया जाना जरूरी है। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अशोक सिंघल का ध्येय सनातन धर्म और सांस्कृतिक परंपराओं की रक्षा करना था। उन्होंने अयोध्या में राम जन्मभूमि से जुड़े इतिहास और लंबे समय तक चले आंदोलनों का भी उल्लेख किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राम जन्मभूमि की मुक्ति के लिए विभिन्न कालखंडों में संतों, धर्माचार्यों और समाज के अलग-अलग वर्गों ने संघर्ष किया। उन्होंने कहा कि राम मंदिर आंदोलन ने समाज के विभिन्न वर्गों को एक मंच पर लाने में भूमिका निभाई। मुख्यमंत्री ने अशोक सिंघल को इस आंदोलन के प्रमुख नेतृत्वकर्ताओं में शामिल बताते हुए उनके योगदान को याद किया। विहिप के केंद्रीय संगठन महामंत्री मिलिंद परांडे ने कहा कि समाज में मौजूद विषमताएं और आचरण संबंधी दोष धर्म की मूल शिक्षा नहीं हैं। उन्होंने कहा कि अशोक सिंघल ने सामाजिक समरसता को केवल विचार या प्रतीक तक सीमित रखने के बजाय उसे व्यवहार में उतारने का प्रयास किया। परांडे ने राम जन्मभूमि मंदिर के शिलान्यास का प्रसंग भी याद किया। उन्होंने कहा कि उस अवसर पर अनेक संत और धर्माचार्य मौजूद थे, लेकिन अशोक सिंघल ने आग्रह किया कि शिलान्यास कामेश्वर चौपाल के हाथों से कराया जाए। उन्होंने इसे सामाजिक समरसता की दिशा में महत्वपूर्ण उदाहरण बताया।उन्होंने कहा कि अशोक सिंघल ने विहिप के माध्यम से सेवा कार्यों को विस्तार देने के लिए देश-विदेश में प्रवास किया। जनजातीय क्षेत्रों में एकल विद्यालयों के विस्तार और लोगों को सेवा कार्यों से जोड़ने में उनकी भूमिका रही। समारोह में मनकामेश्वर महादेव मंदिर की महंत देव्या गिरि समेत मंदिरों और गुरुद्वारों से जुड़े प्रमुख लोग भी उपस्थित रहे। अशोक सिंघल का जन्म 27 सितंबर 1926 को आगरा में हुआ था। उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से धातुकर्म इंजीनियरिंग की शिक्षा प्राप्त की और 1942 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े। बाद में वे संघ के पूर्णकालिक प्रचारक बने। वर्ष 1980 में उन्हें विश्व हिंदू परिषद में जिम्मेदारी मिली और 1984 में वे संगठन के महासचिव बने। आगे चलकर उन्होंने विहिप के अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाली। अयोध्या के राम जन्मभूमि आंदोलन में अशोक सिंघल प्रमुख चेहरों में शामिल रहे। कारसेवा और राम मंदिर निर्माण के लिए जनसमर्थन जुटाने में उनकी भूमिका रही। 17 नवंबर 2015 को गुरुग्राम में उनका निधन हुआ। जन्म शताब्दी वर्ष के उद्घाटन समारोह में वक्ताओं ने उनके सामाजिक, धार्मिक और संगठनात्मक योगदान को याद किया।