Aug 18, 2026

युवाओं के लिए वरदान बनी ‘मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना’: ₹25 लाख तक का लोन और सब्सिडी की डबल डोज,अब तक 33,600 से अधिक लोग लाभान्वित

post-img

देहरादून। उत्तराखंड में रोजगार की तलाश कर रहे युवाओं के लिए मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना किसी बड़े अवसर से कम नहीं है। राज्य सरकार की इस योजना के तहत युवा और प्रवासी अपना व्यवसाय शुरू करने के लिए 10 लाख से 25 लाख रुपये तक का ऋण हासिल कर सकते हैं। खास बात यह है कि परियोजना की श्रेणी के आधार पर सरकार की ओर से 15 से 25 प्रतिशत तक अनुदान (सब्सिडी) भी उपलब्ध कराया जाता है। योजना का उद्देश्य युवाओं को नौकरी तलाशने के बजाय अपना कारोबार शुरू कर रोजगार देने वाला बनाना है।

सरकार का विशेष जोर पर्वतीय और सीमांत जिलों के युवाओं को स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार से जोड़ने पर है। इसके जरिए पलायन रोकने और पहाड़ों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है। मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत एमएसएमई नीति के अनुसार परियोजनाओं को A, B, C और D श्रेणियों में रखा जाता है। इन श्रेणियों के आधार पर परियोजना लागत का 15 से 25 प्रतिशत तक अनुदान दिए जाने का प्रावधान है। ऋण और अनुदान की सुविधा से ऐसे युवाओं को भी अपना उद्यम शुरू करने का अवसर मिल सकता है, जिनके पास कारोबार शुरू करने के लिए पर्याप्त पूंजी उपलब्ध नहीं है। योजना के तहत बैंक ऋण के माध्यम से व्यवसाय शुरू करने के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाती है। मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना का असर खास तौर पर उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में दिखाई दे रहा है। चमोली, अल्मोड़ा, पौड़ी गढ़वाल, पिथौरागढ़ और उत्तरकाशी जैसे जिलों में युवाओं ने पारंपरिक रोजगार के विकल्पों से आगे बढ़कर नए उद्यम शुरू किए हैं। इनमें डेयरी फार्मिंग, होमस्टे, बेकरी, कंप्यूटर सेवा केंद्र समेत पर्यटन और स्थानीय जरूरतों से जुड़े कई व्यवसाय शामिल हैं। इससे युवाओं को अपने गांव और क्षेत्र में ही आय का साधन विकसित करने का मौका मिल रहा है। पर्वतीय क्षेत्रों में पर्यटन की संभावनाओं को देखते हुए कई युवा होमस्टे और पर्यटन आधारित व्यवसायों की ओर बढ़ रहे हैं। वहीं डेयरी, खाद्य प्रसंस्करण और बेकरी जैसे कारोबार स्थानीय बाजार की जरूरतों को पूरा करने के साथ आय का स्थायी जरिया बन सकते हैं। कंप्यूटर सेवा केंद्र जैसे छोटे व्यवसाय भी ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल सेवाओं की बढ़ती मांग के कारण युवाओं के लिए रोजगार का विकल्प बन रहे हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मुताबिक मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना 2.0 के माध्यम से 33,600 से अधिक लोग लाभान्वित हो चुके हैं। सरकार का दावा है कि योजना का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत रोजगार उपलब्ध कराना नहीं है, बल्कि ऐसे उद्यम तैयार करना भी है जो आगे चलकर दूसरे लोगों को रोजगार दे सकें। यानी योजना के जरिए एक युवा खुद आत्मनिर्भर बनने के साथ अपने व्यवसाय के विस्तार के बाद अन्य युवाओं को भी काम दे सकता है। उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों से रोजगार के लिए होने वाला पलायन लंबे समय से चुनौती रहा है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर कारोबार शुरू करने के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना सरकार की पलायन रोकने की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। सरकार की कोशिश है कि पहाड़ का युवा रोजगार के लिए शहरों या दूसरे राज्यों का रुख करने के बजाय अपने गांव और जिले में ही व्यवसाय खड़ा करे। मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना इसी सोच को जमीन पर उतारने की दिशा में काम कर रही है। ऋण, सब्सिडी और सरकारी सहयोग के जरिए स्वरोजगार का यह मॉडल यदि व्यापक स्तर पर सफल होता है तो उत्तराखंड के युवाओं के लिए आर्थिक आत्मनिर्भरता के साथ-साथ पर्वतीय क्षेत्रों की स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकता है।