उत्तराखंड के दूरस्थ और विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले पर्वतीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में सोमवार को एक बड़ा कदम उठाया गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने कैंप कार्यालय से चार अत्याधुनिक एंबुलेंस को हरी झंडी दिखाकर (फ्लैग ऑफ) रवाना किया। कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व के तहत एचडीएफसी बैंक द्वारा जनहित में समर्पित की गई ये एंबुलेंस पूरी तरह से आधुनिक चिकित्सा उपकरणों से लैस हैं, जो पहाड़ के 'अंतिम छोर' पर बैठे व्यक्ति तक आपातकालीन चिकित्सा पहुंचाने का काम करेंगी। इस पहल की सबसे खास बात यह है कि इन एंबुलेंस में केवल वाहन ही नहीं, बल्कि डॉक्टर और लाइफ-सपोर्ट सिस्टम जैसी सुविधाएं भी मौके पर मौजूद रहेंगी।
पहाड़ों में सड़क हादसों, प्रसव पीड़ा या अचानक तबीयत बिगड़ने पर समय से अस्पताल पहुंचना हमेशा से एक बड़ी चुनौती रहा है। इसे ध्यान में रखते हुए पहले चरण के तहत इन चारों अत्याधुनिक एंबुलेंस को राज्य के चार बेहद संवेदनशील और दूरस्थ पर्वतीय जिलों में तैनात किया जा रहा है। भविष्य में इन वाहनों का उपयोग राज्य में होने वाले बड़े धार्मिक आयोजनों, यात्राओं और आपदा प्रबंधन के कार्यों में भी किया जाएगा, जहां त्वरित रिस्पांस की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। आमतौर पर सरकारी एंबुलेंस सेवाओं में स्टाफ या रखरखाव की कमी एक बड़ी समस्या बनकर उभरती है, लेकिन इस बार बैंक और सरकार ने मिलकर इसका बेहद ठोस समाधान निकाला है। बैंक अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि इन एंबुलेंस में मरीजों के लिए सभी आवश्यक आपातकालीन और आधुनिक जीवन रक्षक उपकरण इंस्टॉल किए गए हैं। इसके साथ ही, आगामी तीन वर्षों तक प्रत्येक एंबुलेंस के संचालन का पूरा जिम्मा बैंक संभालेगा। इन एंबुलेंस में तैनात होने वाले डॉक्टर, नर्स, अटेंडेंट और ड्राइवर की व्यवस्था और उनके वेतन का भुगतान भी बैंक की ओर से ही किया जाएगा। इससे स्थानीय प्रशासन पर कोई अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा और मरीजों को 24 घंटे विशेषज्ञ सेवाएं मिल सकेंगी। एंबुलेंस को रवाना करने के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एचडीएफसी बैंक की इस जनकल्याणकारी पहल की मुक्तकंठ से सराहना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार राज्य के प्रत्येक नागरिक, विशेषकर पहाड़ों के दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है। उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में समय पर चिकित्सा सहायता मिलना किसी का जीवन बचाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण होता है। निजी संस्थाओं द्वारा जनहित में किया जा रहा यह सहयोग सामाजिक उत्तरदायित्व का एक बेहतरीन और अनुकरणीय उदाहरण है। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान बैंक के शीर्ष अधिकारियों से अपील की कि वे उत्तराखंड के अन्य बचे हुए पर्वतीय जिलों में भी इसी तरह की सेवाएं विस्तार दें। इसके साथ ही सीएम धामी ने आगामी हरिद्वार कुंभ मेले के दौरान उमड़ने वाली देश-विदेश की भीड़ को देखते हुए, बैंक से सीएसआर मद के जरिए और अधिक एंबुलेंस उपलब्ध कराने की अपेक्षा जताई है। निश्चित रूप से, सरकार और कॉरपोरेट जगत का यह मिला-जुला प्रयास उत्तराखंड के ग्रामीण और पर्वतीय अंचलों के लिए एक संजीवनी साबित होने जा रहा है, जिससे स्वास्थ्य के क्षेत्र में पलायन और इलाज के अभाव में होने वाली मौतों पर काफी हद तक लगाम लगाई जा सकेगी।