Jul 25, 2026

पारदर्शी प्रतियोगी परीक्षाओं से खिलवाड़ करने वालों को मिले कठोरतम सजा: सांसद निशिकांत दुबे की मांग

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देवघर। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर के बाद राजनीतिक गलियारों में बयानबाजी तेज हो गई है। इस पूरे घटनाक्रम पर गोड्डा से भाजपा सांसद निशिकांत दुबे की तीखी और बड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है। मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को देश के सबसे 'दुर्भाग्यपूर्ण निर्णयों' में से एक करार दिया। इसके साथ ही उन्होंने छात्रों के अभिभावकों से बच्चों को आंदोलनों से दूर रखने की अपील की और झारखंड लोक सेवा आयोग धांधली मामले में राज्य की हेमंत सरकार पर करारा हमला बोला।

सांसद निशिकांत दुबे ने धर्मेंद्र प्रधान का बचाव करते हुए कहा कि वे भारतीय जनता पार्टी के एक बेहद वरिष्ठ और कुशल नेता हैं, जिन्होंने देश के शिक्षा क्षेत्र में कई दूरगामी और सकारात्मक बदलाव किए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि धर्मेंद्र प्रधान ने किसी राजनीतिक दबाव में आकर इस्तीफा नहीं दिया है, बल्कि छात्रों के मन में फैले भ्रम (कंफ्यूजन) को दूर करने और उनकी जिद को पूरा करने के लिए यह कदम उठाया है। निशिकांत दुबे ने कहा "कभी-कभी परिवार के बड़े और अभिभावक बच्चों की जिद्दी प्रवृत्ति के आगे झुक जाते हैं। धर्मेंद्र प्रधान ने भी एक अभिभावक की भूमिका निभाते हुए इस्तीफा दिया है। उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान नीट जैसी कठिन और विशाल परीक्षाओं को पूरी पारदर्शिता और बेहतर ढंग से आयोजित कराने का काम किया था। सांसद ने देश के अभिभावकों से भावुक अपील करते हुए कहा कि वे अपने बच्चों को राजनीतिक आंदोलनों का हिस्सा न बनने दें। अपने जीवन का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा, "मैं खुद एक सामान्य गांव के स्कूल से पढ़कर देश का सांसद बना हूँ। आज जब मैं विदेशी सांसदों के बीच बैठता हूँ तो खुद को किसी से कम नहीं समझता। इसकी वजह सिर्फ मेहनत है और मैं आज भी रोजाना पढ़ाई करता हूँ। उन्होंने कहा कि यदि अभिभावक अपने बच्चों को देश का आईएएस, आईपीएस, डॉक्टर या इंजीनियर बनाना चाहते हैं, तो उन्हें घर में रहकर लगन से पढ़ाई करने के लिए प्रेरित करें न कि सड़कों पर आंदोलन करने के लिए। धर्मेंद्र प्रधान के मुद्दे के साथ-साथ निशिकांत दुबे ने झारखंड लोक सेवा आयोग मामले में चल रही कार्रवाई को लेकर राज्य सरकार को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने राज्य सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए गंभीर आरोप लगाए। सांसद ने कहा कि झारखंड की मौजूदा सरकार की मंशा साफ नहीं है और वह भ्रष्ट प्रवृत्ति के लोगों का खुलकर समर्थन कर रही है। उन्होंने कहा धांधली के आरोप में जेपीएससी  चेयरमैन एल. खियांग्ते को पद से हटाना काफी नहीं है। इसमें शामिल तीन अन्य अधिकारियों पर भी तत्काल कार्रवाई होनी चाहिए, क्योंकि निचले स्तर पर बैठे अधिकारी ही परीक्षाओं के संचालन में धांधली को अंजाम दे रहे हैं।" पोड़ैयाहाट में एक डीएसओ की गिरफ्तारी और इसमें भाजपा कार्यकर्ताओं की कथित संलिप्तता के सवाल पर सांसद निशिकांत दुबे ने बेहद सख्त रुख अपनाया। उन्होंने बिना किसी पक्षपात के साफ लहजे में कहा कि जो भी व्यक्ति, चाहे वह किसी भी दल या पद से जुड़ा हो, अगर उसने छात्रों और युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है, तो उसे सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने दोटूक कहा कि परीक्षा धांधली में शामिल ऐसे सभी दोषियों को फांसी के फंदे पर लटका दिया जाना चाहिए।