Oct 05, 2026

उत्तर प्रदेश में 30 हजार करोड़ रुपये की सरकारी संपत्तियां बेचेगी सरकार: 'री-लांच' फॉर्मूले से संवरेंगे प्लाट, फ्लैट और दुकानें; सुविधाओं के दम पर ग्राहकों को लुभाने की तैयारी

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मुरादाबाद। उत्तर प्रदेश के विकास प्राधिकरणों में वर्षों से धूल फांक रही और सरकारी तंत्र की सुस्ती के कारण फंसी करीब 30 हजार करोड़ रुपये की संपत्तियों को लेकर प्रदेश सरकार ने एक बड़ा और रणनीतिक फैसला लिया है। मुरादाबाद विकास प्राधिकरण (एमडीए) समेत राज्य के 28 विकास प्राधिकरणों में बिक्री का इंतजार कर रहे हजारों प्लाट, फ्लैट, दुकान और व्यावसायिक परिसरों को अब चमकाकर यानी 'री-लांच' कर बाजार में उतारा जाएगा।

यूपी के विकास प्राधिकरणों में लंबे समय से बिक्री का इंतजार कर रही करीब 30 हजार करोड़ रुपये की संपत्तियों को अब नए कलेवर में बाजार में उतारने की तैयारी है। प्रदेश सरकार ने ऐसी संपत्तियों को री-लॉन्च कर बिक्री बढ़ाने की योजना बनाई है। इसके तहत पुराने और जर्जर फ्लैट, आवासीय एवं व्यावसायिक संपत्तियों की मरम्मत, रंगाई-पुताई और बाहरी स्वरूप में सुधार किया जाएगा। वहीं खाली प्लॉटों में सड़क, प्रकाश व्यवस्था, पार्क और अन्य उपलब्ध सुविधाओं को बेहतर तरीके से प्रदर्शित किया जाएगा। मुरादाबाद विकास प्राधिकरण (एमडीए) की विभिन्न योजनाओं में बड़ी संख्या में संपत्तियां लंबे समय से बिक्री की प्रतीक्षा में हैं। इनमें सीतापुरी-दससराय, अमृत कुंज, उद्यम विहार, ढक्का क्षेत्र की अरावली और प्रधानमंत्री आवास योजना समेत कई योजनाएं शामिल हैं। इन योजनाओं में आवासीय प्लॉट, दुकानें, फ्लैट और व्यावसायिक संपत्तियों के साथ स्कूल के लिए आरक्षित भूखंड भी मौजूद हैं। लंबे समय से बिक्री नहीं होने के कारण प्राधिकरण की बड़ी पूंजी इन संपत्तियों में फंसी हुई है। एमडीए की स्थिति से प्रदेश के अन्य विकास प्राधिकरणों की तस्वीर का भी अंदाजा लगाया जा सकता है। जानकारी के मुताबिक प्रदेश के 28 विकास प्राधिकरणों में भी बड़ी संख्या में ऐसी संपत्तियां बिक्री के लिए शेष हैं। मुरादाबाद में पिछले एक साल के दौरान विभिन्न योजनाओं के करीब 60 से 70 आवास ही बिक सके। इसके बाद सरकार ने बिक्री बढ़ाने के लिए संपत्तियों को नए स्वरूप में बाजार में उतारने की रणनीति तैयार की है। सरकार की योजना के अनुसार जिन संपत्तियों में मरम्मत की जरूरत है, वहां आवश्यक कार्य कराए जाएंगे। फ्लैट और आवासीय भवनों की रंगाई-पुताई, बाहरी हिस्से का सुधार और बिजली-पानी जैसी सुविधाओं को दुरुस्त किया जाएगा। खाली प्लॉटों के मामले में सड़क, स्ट्रीट लाइट, पार्क और आसपास उपलब्ध सुविधाओं को बेहतर ढंग से प्रस्तुत किया जाएगा। उद्देश्य यह है कि संभावित खरीदार को संपत्ति की वास्तविक स्थिति और उसके आसपास की सुविधाओं की स्पष्ट तस्वीर मिल सके। इससे पहले बिक्री बढ़ाने के लिए एजेंसी के माध्यम से संपत्तियों को बेचने की कोशिश की गई थी। इसके लिए टेंडर भी निकाला गया, लेकिन किसी एजेंसी ने इसमें रुचि नहीं दिखाई। इसके बाद कुछ संपत्तियों को मूल कीमत से 15 से 20 प्रतिशत तक कम कीमत पर बेचने का प्रस्ताव रखा गया। इसके बावजूद बिक्री में अपेक्षित तेजी नहीं आई और कुछ ही आवास बिक सके। अब सरकार संपत्तियों की कीमत में लगातार कटौती करने के बजाय उन्हें बेहतर स्वरूप देकर दोबारा बाजार में उतारने की तैयारी कर रही है। री-लॉन्च के बाद एमडीए इन संपत्तियों को मौजूदा दरों पर बेचने की प्रक्रिया आगे बढ़ाएगा। इससे विकास प्राधिकरणों की लंबे समय से फंसी पूंजी को निकालने और योजनाओं को गति देने की उम्मीद है। एमडीए उपाध्यक्ष अनुभव सिंह के मुताबिक बिक्री के लिए शेष संपत्तियों का बेहतर प्रस्तुतीकरण किया जाएगा। जहां जरूरत होगी, वहां सुविधाओं और बाहरी स्वरूप में सुधार कराया जाएगा। सरकार की योजना के अनुरूप संपत्तियों को री-लॉन्च कर बिक्री बढ़ाने पर काम किया जाएगा। योजना के अमल में आने के बाद प्रदेशभर में वर्षों से खाली पड़ी अथवा बिक्री की प्रतीक्षा कर रही संपत्तियों को नया बाजार मिलने की उम्मीद है। अब निगाह इस बात पर रहेगी कि री-लॉन्च के बाद खरीदारों की रुचि कितनी बढ़ती है और विकास प्राधिकरणों की अटकी हुई संपत्तियां कितनी तेजी से बिक पाती हैं।