जामताड़ा। साइबर अपराध के गढ़ के रूप में कुख्यात जामताड़ा जिले से ठगी का एक बेहद हैरान और चौंकाने वाला नया ट्रेंड सामने आया है। अब तक जंगल, झाड़ियों और सूने खेतों में बैठकर लोगों की गाढ़ी कमाई उड़ाने वाले शातिर ठगों ने अब सीधे 'ज्ञान के मंदिर' यानी सरकारी स्कूलों को ही अपना नया ठिकाना बना लिया है। जामताड़ा पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए करमाटांड़ थाना क्षेत्र के एक सरकारी स्कूल के बरामदे और अन्य ठिकानों से रंगे हाथ ठगी करते हुए तीन शातिर साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ साइबर थाने में मामला दर्ज कर उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में जामताड़ा जेल भेज दिया है।
जानकारी के अनुसार, साइबर अपराधियों के खिलाफ जिला पुलिस द्वारा चलाए जा रहे लगातार छापेमारी अभियान के दौरान पुलिस को एक सटीक खुफिया इनपुट मिला था। सूचना के आधार पर जब पुलिस टीम ने करमाटांड़ थाना अंतर्गत ताराबहाल उत्क्रमित मध्य विद्यालय में अचानक दबिश दी, तो वहां का नजारा देखकर अधिकारी भी दंग रह गए। जिस स्कूल के बरामदे में बैठकर बच्चे अपना भविष्य संवारते हैं, वहां बैठकर ये शातिर अपराधी लोगों के बैंक खाते खाली करने का काला खेल खेल रहे थे। इसके अलावा पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पैराटल गांव में भी छापेमारी कर दो अन्य अपराधियों को रंगे हाथ दबोच लिया। साइबर थाना के डीएसपी अमित कुमार ने प्रेस वार्ता में बताया कि गिरफ्तार अपराधियों के पास से 6 आधुनिक मोबाइल फोन और 4 फर्जी सिम कार्ड बरामद किए गए हैं। पुलिस की प्रारंभिक जांच और पूछताछ में ठगों ने अपने जिस अनोखे तौर-तरीके (मोडस ऑपेरंडी) का खुलासा किया है, वह बेहद चौंकाने वाला है। ये अपराधी एक संदिग्ध मोबाइल ऐप के जरिए ग्राहकों के फोन-पे नंबर पर ₹1,999 के फर्जी कैशबैक का मैसेज भेजते थे। जैसे ही कोई सीधा-साधा ग्राहक लालच में आकर उस मैसेज के लिंक को एक्सेप्ट या क्लिक करता था, उसकी बैंकिंग से जुड़ी सारी गोपनीय डिटेल्स तुरंत इन अपराधियों के सर्वर पर पहुंच जाती थी। इसके बाद पलक झपकते ही खाते से पैसे उड़ा दिए जाते थे। गिफ्ट कार्ड का खेल: खाते से उड़े पैसों को सीधे ट्रांसफर करने के बजाय ये ठग ऑनलाइन शॉपिंग साइट्स के 'गिफ्ट कार्ड' खरीद लेते थे। बाद में उन गिफ्ट कार्ड्स को बाजार में भारी कमीशन पर बेचकर कैश (नकद) हासिल कर लेते थे ताकि पुलिस की पकड़ में न आ सकें। स्कूल जैसे सुरक्षित और पवित्र परिसर का इस्तेमाल ठगी के लिए होने की खबर जैसे ही इलाके में फैली, स्थानीय ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। लोगों का कहना है कि बच्चों के जाने के बाद या स्कूल के समय में इन अपराधियों का वहां बैठना बच्चों की सुरक्षा के लिहाज से भी खतरनाक है। घटना के बाद से जामताड़ा पुलिस ने सरकारी स्कूलों, सार्वजनिक भवनों और पंचायत सचिवालयों के आसपास रात और दिन की गश्त को कई गुना बढ़ा दिया है। पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि किसी भी अनजान नंबर से आए कैशबैक या लॉटरी के लिंक पर भूलकर भी क्लिक न करें।