Mar 13, 2026

एटीएम फ्रॉड और टेक्निकल एरर पर कड़ा फैसला: देहरादून में एसबीआई को 2022 से चल रहे मामले में मिली सजा

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भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) को एक छोटी तकनीकी गड़बड़ी भारी पड़ गई। देहरादून के डालनवाला निवासी एक उपभोक्ता ने अपने खाते से गलत तरीके से कटे 20 हजार रुपये को लेकर करीब तीन साल तक कानूनी लड़ाई लड़ी। आखिरकार देहरादून जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने बैंक को न केवल कटे हुए 20 हजार रुपये लौटाने बल्कि कुल 1.49 लाख रुपये का हर्जाना देने का आदेश दिया है। एटीएम से पैसा नहीं निकला, फिर भी खाते से कट गए रुपये .मामले के अनुसार डालनवाला निवासी गुरवंत सिंह ने 23 फरवरी 2022 को एसबीआई के एटीएम से 10 हजार रुपये निकालने के लिए कार्ड स्वाइप किया था। उस समय मशीन से न तो नकद राशि निकली और न ही उनके मोबाइल पर कोई एसएमएस आया। गुरवंत सिंह इसे तकनीकी खराबी मानकर वहां से लौट गए। लेकिन कुछ दिनों बाद जब उन्होंने अपने खाते की जानकारी ली तो पता चला कि 3 और 4 मार्च को उनके खाते से अचानक 20 हजार रुपये डेबिट हो गए हैं। इससे हैरान होकर उन्होंने तुरंत बैंक में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के बाद बैंक अधिकारियों ने अपनी आंतरिक लॉग रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया कि एटीएम से नकदी निकल चुकी है, इसलिए बैंक इस मामले में कुछ नहीं कर सकता। बैंक के इस रवैये से असंतुष्ट होकर गुरवंत सिंह ने दिसंबर 2022 में देहरादून जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में शिकायत दर्ज कराई। सुनवाई के दौरान आयोग ने बैंक से यह साबित करने के लिए ठोस साक्ष्य मांगे कि एटीएम से निकाली गई राशि वास्तव में उपभोक्ता को मिली थी। हालांकि बैंक इस बात को साबित नहीं कर पाया। आयोग के अध्यक्ष पुष्पेंद्र सिंह खरे और सदस्य अलका नेगी की पीठ ने कहा कि बैंक केवल अपनी आंतरिक मशीन रिपोर्ट के आधार पर उपभोक्ता के दावे को खारिज नहीं कर सकता।

आयोग ने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की गाइडलाइन का हवाला देते हुए कहा कि अगर बैंक शिकायत मिलने के सात कार्यदिवस के भीतर समस्या का समाधान नहीं करता है, तो उसे प्रतिदिन 100 रुपये का मुआवजा देना होता है। आयोग के अनुसार शिकायत 4 मार्च 2022 को दर्ज की गई थी। इसके सात दिन बाद यानी 11 मार्च से लेकर 5 अगस्त 2025 तक कुल 1243 दिन का समय बीत गया। इस आधार पर 100 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से 1,24,300 रुपये का विलंब शुल्क लगाया गया। इसके अलावा आयोग ने बैंक को आदेश दिया कि वह उपभोक्ता के खाते से काटे गए 20 हजार रुपये वापस करे और मानसिक उत्पीड़न व कानूनी खर्च के रूप में 5 हजार रुपये अतिरिक्त दे। इस तरह कुल मुआवजा 1.49 लाख रुपये तय किया गया। आयोग की सदस्य अलका नेगी ने कहा कि जब भी कोई उपभोक्ता बैंक में शिकायत दर्ज कराए तो उसकी लिखित रिसीविंग जरूर ले। कई बार बैंक उपभोक्ताओं को लंबे समय तक टालते रहते हैं। ऐसी स्थिति में उपभोक्ता आरबीआई के नियमों का हवाला दे सकते हैं और जरूरत पड़ने पर सीधे जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत कर न्याय पा सकते हैं। यह फैसला बैंकिंग सेवाओं में उपभोक्ता अधिकारों की सुरक्षा के लिहाज से एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।