Sep 21, 2026

कागजी नहीं,धरातल पर मिले समाधान: मुख्य सेवक सदन में बोले सीएम धामी-जनसमस्याओं के निस्तारण में कोताही बर्दाश्त नहीं

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देहरादून। जनसमस्याओं का समाधान राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। शासन-प्रशासन के प्रत्येक स्तर पर अधिकारियों को संवेदनशीलता के साथ जनता की समस्याओं को सुनना होगा और उनका समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करना होगा।" यह बात मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में आयोजित जनसुनवाई के दौरान कही।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे लोगों की समस्याएं सुनीं तो जनसुनवाई का केंद्र एक बार फिर सरकार की जवाबदेही और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर रहा। सड़क, पेयजल, बिजली, स्वास्थ्य, शिक्षा, राजस्व, पेंशन, रोजगार और आर्थिक सहायता से जुड़े मामलों को लेकर पहुंचे लोगों ने मुख्यमंत्री के सामने अपनी समस्याएं रखीं। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जनशिकायतों का समाधान केवल फाइलों और कागजी रिपोर्ट तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि संबंधित व्यक्ति को वास्तविक राहत मिलनी चाहिए।मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन समस्याओं का समाधान जिला अथवा विभागीय स्तर पर संभव है, उन्हें अनावश्यक रूप से शासन स्तर पर लंबित रखना उचित नहीं है। अधिकारियों को अपने स्तर पर मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निस्तारित करने के निर्देश देते हुए उन्होंने कहा कि आमजन को किसी छोटे से काम के लिए बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें, इसके लिए प्रशासनिक कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी और संवेदनशील बनाया जाना जरूरी है। जनसुनवाई में मुख्यमंत्री का सबसे स्पष्ट संदेश शिकायतों के निस्तारण की गुणवत्ता और निगरानी को लेकर रहा। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि प्रत्येक प्रकरण पर गंभीरता से कार्रवाई हो और उसके निस्तारण की नियमित मॉनिटरिंग की जाए। महत्वपूर्ण बात यह रही कि मुख्यमंत्री ने समाधान की प्रक्रिया को केवल कागजी औपचारिकता से अलग रखने पर जोर दिया। सरकार के सामने बड़ी चुनौती यही है कि किसी शिकायत पर आदेश जारी होने के बाद उसका वास्तविक असर संबंधित व्यक्ति तक पहुंचे। सड़क की समस्या में मौके पर काम शुरू हो, पेयजल की शिकायत में पानी उपलब्ध हो, पेंशन से जुड़ा मामला वास्तव में सुलझे और रोजगार अथवा आर्थिक सहायता के पात्र व्यक्ति को योजना का लाभ मिले—जनसुनवाई की सफलता का वास्तविक पैमाना यही होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनशिकायतों के समाधान के लिए सीएम हेल्पलाइन-1905, जनसुनवाई और ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ जैसे कार्यक्रमों को प्रभावी बनाया जा रहा है। सरकार का दावा है कि इन अभियानों के माध्यम से प्रशासनिक अमला जनता के बीच पहुंचकर शिकायतों के समाधान के साथ पात्र लोगों को विभिन्न सरकारी योजनाओं और सेवाओं से भी जोड़ रहा है। इस व्यवस्था का उद्देश्य केवल शिकायत सुनना नहीं, बल्कि सरकारी सेवाओं को लोगों के करीब ले जाना है। दूरदराज और पर्वतीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए यह पहल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि कई बार सामान्य प्रशासनिक कार्यों के लिए जिला मुख्यालय तक पहुंचना समय और संसाधन दोनों की दृष्टि से चुनौतीपूर्ण होता है। मुख्यमंत्री ने बताया कि 17 सितंबर से शुरू हुआ सेवा संकल्प अभियान 17 अक्टूबर 2026 तक आयोजित किया जा रहा है। अभियान के तहत सेवा, जनभागीदारी, संवाद और नवाचार से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसके अंतर्गत ‘सेवा सेतु अभियान’ के तहत ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ कार्यक्रम के साथ स्वास्थ्य एवं बहुउद्देशीय शिविर भी आयोजित किए जाएंगे। इन शिविरों के जरिए केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं एवं सेवाओं को आमजन तक पहुंचाने की कोशिश की जाएगी। खासकर ऐसे पात्र लोगों को सरकारी योजनाओं से जोड़ना, जो जानकारी या प्रक्रिया के अभाव में अब तक लाभ से वंचित रहे हैं, अभियान की उपयोगिता को बढ़ा सकता है। जनसमस्याओं की सुनवाई के साथ मुख्यमंत्री ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्तराखंड का नाम रोशन करने वाले खिलाड़ियों से भी मुलाकात की। 9वीं हीरोज अंतरराष्ट्रीय ताइक्वांडो चैंपियनशिप-2026 में पदक जीतने वाले उत्तराखंड के खिलाड़ियों ने मुख्यमंत्री से भेंट की। यह प्रतियोगिता 31 जुलाई से 2 अगस्त तक पटाया, चोनबुरी, थाईलैंड में आयोजित हुई थी। उत्तराखंड के मन्नू सोनकर, शिवानी दाबसा, मोहम्मद जकी और मुकुल ने स्वर्ण पदक हासिल किया, जबकि मेघा शर्मा और धनंजय धारीवाल ने कांस्य पदक जीते। मुख्यमंत्री ने सभी पदक विजेताओं को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। जनसुनवाई में सामने आया संदेश स्पष्ट है—सरकार की योजनाओं और प्रशासनिक घोषणाओं का अंतिम मूल्यांकन कागज पर नहीं, बल्कि जनता को मिली वास्तविक राहत से होगा। अब अधिकारियों के सामने चुनौती यही है कि मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुरूप शिकायतों का निस्तारण समयबद्ध होने के साथ-साथ जमीन पर भी दिखाई दे।