Jun 18, 2026

12 नवंबर 2018 की पुरानी समय-सीमा बदली: अब नए उपनल कर्मचारियों को भी पूरा हक

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देहरादून। उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार ने राज्य के हजारों उपनल (उत्तराखंड पूर्व सैनिक कल्याण निगम) कर्मचारियों के हित में अब तक का सबसे बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठक में "समान कार्य के लिए समान वेतन" के दायरे का विस्तार करते हुए सालों से चली आ रही विसंगति को हमेशा के लिए खत्म कर दिया गया है। सरकार ने नैनीताल हाईकोर्ट के आदेश और सुप्रीम कोर्ट के कड़े निर्देशों के अनुरूप पात्रता की 'कट-ऑफ डेट' को संशोधित करने के प्रस्ताव पर अपनी अंतिम मुहर लगा दी है। सरकार के इस संवेदनशील फैसले से सीधे तौर पर उन 11 हजार से अधिक कर्मचारियों के घरों में खुशियों का नया सवेरा आया है, जो अब तक इस वित्तीय लाभ से वंचित थे।

दरअसल, अब तक राज्य में उपनल कर्मचारियों को समान कार्य-समान वेतन का लाभ देने के लिए 12 नवंबर 2018 की कट-ऑफ़ डेट लागू थी। इसका सीधा नुकसान यह हो रहा था कि इस तारीख के बाद सेवा में आए हजारों कर्मचारियों को समान काम करने के बावजूद नियमित कर्मचारियों की तुलना में बेहद कम मानदेय मिल रहा था। कैबिनेट ने अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा 15 अक्टूबर 2024 को पारित आदेश को आधार बनाते हुए इस पुरानी समय-सीमा को बदल दिया है। अब नई व्यवस्था के तहत 15 अक्टूबर 2024 तक सेवा में आ चुके सभी पात्र उपनल कर्मचारियों को उनके समकक्ष सरकारी सेवकों के बराबर वेतन मिलने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। वर्तमान में उत्तराखंड के विभिन्न सरकारी विभागों, निगमों और परिषदों में लगभग 22,000 उपनल कर्मचारी अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इनमें से करीब 11,000 कर्मचारियों को पुरानी व्यवस्था के तहत पहले ही समान वेतन का लाभ मिल रहा था। कैबिनेट के इस ताजा फैसले के बाद शेष बचे 11,000 से अधिक कर्मचारियों को भी इस सुरक्षा कवच के दायरे में शामिल कर लिया गया है। शासकीय सूत्रों के अनुसार, इन कर्मचारियों को मिलने वाली बढ़ी हुई वेतन राशि चरणबद्ध तरीके से उनके खातों में भेजी जाएगी, जिससे राज्य के खजाने और व्यवस्था दोनों में संतुलन बना रहे। राजनीतिक और प्रशासनिक विश्लेषकों का मानना है कि धामी सरकार का यह निर्णय राज्य की सियासी दिशा बदलने की ताकत रखता है। प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों से ठीक पहले, 22 हजार से ज्यादा कर्मचारियों और उनके लाखों परिजनों को सीधे प्रभावित करने वाला यह फैसला भाजपा सरकार के लिए मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है। इस संवेदनशील और बड़े फैसले का सकारात्मक संदेश राज्य के पूरे कर्मचारी वर्ग और उनके जुड़े संगठनों तक बहुत तेजी से पहुंचा है। "यह सिर्फ एक सरकारी फैसला नहीं, बल्कि प्रदेश के 22 हजार उपनल कर्मचारियों और उनके परिवारों के लंबे संघर्ष, भावनाओं और सम्मान की जीत है। सालों से हमारे कर्मचारी इस ऐतिहासिक घड़ी की प्रतीक्षा कर रहे थे। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हमारी मांग को स्वीकार कर देवभूमि के युवाओं का दिल जीत लिया है। हमारा संगठन जल्द ही मुख्यमंत्री का नागरिक अभिनंदन कर उनका आभार व्यक्त करेगा। कैबिनेट के इस फैसले की खबर बाहर आते ही विभिन्न सरकारी विभागों में कार्यरत उपनल कर्मचारियों के बीच जश्न का माहौल देखा गया। कर्मचारियों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर और पटाखे फोड़कर खुशी का इजहार किया। कर्मचारियों का कहना है कि इस व्यवस्था के लागू होने से न केवल उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि समाज में उन्हें एक सम्मानजनक जीवन जीने की सुरक्षा भी मिलेगी। यह फैसला उत्तराखंड के संविदा और आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के इतिहास में राहत, सम्मान और आर्थिक सुरक्षा का एक नया अध्याय साबित होने जा रहा है।