Oct 23, 2026
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तिब्बत में 7 तीव्रता के भूकंप के बाद आपातकालीन राहत अभियान शुरू

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नई दिल्ली। तिब्बत में गुरुवार देर रात आए शक्तिशाली भूकंप ने भारी तबाही मचाई है। उत्तरी तिब्बत के नागकू शहर में 7.0 तीव्रता के विनाशकारी भूकंप ने जान-माल का भारी नुकसान किया है। इस त्रासदी में अब तक 16 लोगों की मौत होने की खबर सामने आई है, जबकि 32 लोग घायल हैं। जिनमें से 11 की हालत अत्यंत नाजुक बनी हुई है। यह बीते पांच वर्षों में तिब्बत क्षेत्र में दर्ज किया गया सबसे शक्तिशाली भूकंप है। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के अनुसार, भारतीय समयानुसार रात करीब 8ः03 बजे धरती डोली। इस तीव्र भूकंप का केंद्र राजधानी ल्हासा से लगभग 400 किलोमीटर दूर नागकू शहर में जमीन से 173 किलोमीटर की गहराई में स्थित था। भूकंप के झटके महसूस होते ही लोग जान बचाने के लिए घरों, दुकानों और होटलों से निकलकर सड़कों की ओर भागे। कई स्थानों पर लगे सीसीटीवी कैमरों में इमारतें डोलती और दुकानों के रैक से सामान गिरते हुए कैद हुए। नागकू नगर प्रशासन के मुताबिक, आपदा में अब तक कम से कम 339 घर पूरी तरह ढह गए हैं, जबकि सैकड़ों अन्य इमारतों में दरारें आ गई हैं। कड़ाके की ठंड के बीच मलबे में दबे जीवित लोगों की तलाश के लिए राहत एवं बचाव दल लगातार अभियान चला रहे हैं। बेघर हुए परिवारों के लिए अस्थायी टेंट और आपातकालीन राहत शिविर स्थापित किए गए हैं। यह प्राकृतिक आपदा ऐसे समय में आई है जब यह क्षेत्र पहले से ही कुदरती मार झेल रहा था। कुछ ही हफ्ते पहले नेपाल और तिब्बत सीमा के समीप भीषण बाढ़ और भूस्खलन ने भयानक तबाही मचाई थी, जिसमें 1,400 से अधिक लोगों की जान चली गई थी। वहीं हाल ही में तिब्बत सीमा से लगे पश्चिमी नेपाल के हिमलुंग हिमाल बेस कैंप पर आए हिमस्खलन में भी 10 लोग लापता हो गए थे। वैज्ञानिकों के अनुसार, तिब्बत दुनिया के सबसे संवेदनशील सीस्मोलॉजिकल जोन्स में आता है। यह पूरा क्षेत्र भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटों की सीमाओं पर स्थित है। इन प्लेटों के निरंतर आपसी टकराव और दबाव के कारण ही हिमालय पर्वत श्रृंखला का निर्माण हुआ है, लेकिन इसी टकराव की वजह से इस समूचे हिमालयी क्षेत्र में लगातार विनाशकारी भूकंप आते रहते हैं।