Jul 17, 2026

रांची, बोकारो, धनबाद और जमशेदपुर में गरज-चमक के साथ भारी बारिश की संभावना

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रांची। झारखंड में सुस्त पड़े मानसून ने एक बार फिर अपनी रफ्तार पकड़ ली है, जिससे राज्य के मौसम के तेवर पूरी तरह बदलने वाले हैं। मौसम केंद्र रांची के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार, शुक्रवार (17 जुलाई) से पूरे राज्य में बारिश की गतिविधियों में भारी तेजी आएगी। मौसम वैज्ञानिकों ने अगले तीन दिनों तक राज्य के अधिकांश हिस्सों में गरज-चमक (मेघगर्जन), तेज हवाओं और कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। खराब मौसम को देखते हुए प्रशासन ने लोगों को विशेष सतर्कता बरतने और आकाशीय बिजली (वज्रपात) के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी है। शुक्रवार को पूरे झारखंड में घने बादलों का डेरा रहेगा। मौसम विभाग के अनुसार, राज्य के लगभग सभी जिलों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की जाएगी, लेकिन कुछ खास इलाकों में मानसून का रौद्र रूप देखने को मिल सकता है।

राजधानी रांची, हजारीबाग, रामगढ़, लोहरदगा, गुमला और खूंटी जिले में भारी बारिश की प्रबल संभावना है। इन जिलों के साथ-साथ बोकारो, धनबाद, जमशेदपुर, पलामू, दुमका और देवघर सहित सभी 24 जिलों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से धूलभरी तेज हवाएं चलने और वज्रपात की आशंका जताई गई है। मौसम केंद्र के मुताबिक, वीकेंड (शनिवार और रविवार) पर भी मानसून का सिस्टम पूरी तरह सक्रिय रहेगा। हजारीबाग, रामगढ़, रांची, लोहरदगा, गुमला, पलामू, गढ़वा, लातेहार, चतरा और खूंटी में तेज बारिश का दौर जारी रहेगा। दक्षिण-पश्चिमी और उससे सटे मध्य झारखंड के इलाकों (रांची, गुमला, खूंटी, लोहरदगा, लातेहार) में मूसलाधार बारिश की संभावना बनी हुई है। बारिश शुरू होने से पहले बीते 24 घंटे में राज्य के कई हिस्सों में उमस और सामान्य से अधिक तापमान दर्ज किया गया। हालांकि, अब बारिश के बाद इसमें भारी गिरावट आने की उम्मीद है। झारखंड के किसानों और आम जनता के लिए यह बारिश बेहद जरूरी है। मौसम केंद्र के आंकड़ों के अनुसार, 1 जून से 17 जुलाई तक राज्य में औसतन केवल 216.8 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है, जबकि सामान्य तौर पर इस अवधि में 359.8 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए थी। इसका मतलब यह है कि राज्य में अब तक करीब 40 प्रतिशत कम बारिश हुई है, जिससे सूखे के हालात बनने लगे थे। मौसम विभाग को उम्मीद है कि अगले तीन दिनों का यह सक्रिय स्पेल इस कमी को काफी हद तक दूर करेगा और खेतों में दम तोड़ रही धान की फसलों को नया जीवनदान देगा।