Sep 05, 2026

कनिष्ठ अभियंताओं के 5400 ग्रेड-पे पर मंथन शुरू: मंत्रिमंडलीय उपसमिति की बैठक में रखे गए तथ्य, खजाने पर पड़ने वाले बोझ का भी आकलन

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देहरादून। उत्तराखंड के विभिन्न सरकारी विभागों में वर्ष 2014 के बाद नियुक्त हुए कनिष्ठ अभियंताओं के वित्तीय स्तरोन्नयन से जुड़ा मामला एक बार फिर गरमा गया है। 10 वर्ष की संतोषजनक सेवा पूरी करने वाले कनिष्ठ अभियंताओं को पूर्व की भांति प्रथम वित्तीय स्तरोन्नयन के रूप में 5400 ग्रेड-पे (लेवल-10) का लाभ दिए जाने के लिए गठित मंत्रिमंडलीय उपसमिति की पहली महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई।

उत्तराखंड में वर्ष 2014 के बाद नियुक्त कनिष्ठ अभियंताओं के लिए 10 वर्ष की सेवा पूरी होने पर प्रथम वित्तीय स्तरोन्नयन के रूप में ग्रेड-पे 5400 यानी लेवल-10 का लाभ दिए जाने का मामला एक बार फिर चर्चा में है। इस संबंध में गठित मंत्रिमंडलीय उपसमिति की बैठक में गुरुवार को मामले के विभिन्न तकनीकी, वित्तीय और नियमों से जुड़े पहलुओं पर विस्तार से मंथन किया गया। हालांकि बैठक में फिलहाल कोई अंतिम निर्णय नहीं हो सका है। समिति ने शासन के अधिकारियों को मामले से जुड़े शेष तथ्यों और आवश्यक जानकारी के साथ अगली बैठक में उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं। दरअसल, उत्तराखंड शासन के वित्त विभाग ने 31 अगस्त 2026 को इस प्रकरण पर विचार के लिए मंत्रिमंडलीय उपसमिति के गठन को मंजूरी दी थी। समिति की अध्यक्षता वन मंत्री को सौंपी गई है, जबकि पशुपालन मंत्री को सदस्य बनाया गया है। वित्त सचिव को समिति को सचिवीय सहायता उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी दी गई है। मामला मुख्य रूप से उन कनिष्ठ अभियंताओं से जुड़ा है, जिनकी नियुक्ति एक जनवरी 2014 के बाद विभिन्न विभागों में हुई है। इन कर्मचारियों की मांग और शासन स्तर पर विचाराधीन प्रस्ताव यह है कि 10 वर्ष की सेवा पूरी करने के बाद उन्हें प्रथम वित्तीय स्तरोन्नयन के रूप में पूर्व की भांति ग्रेड-पे 5400 (लेवल-10) का लाभ दिया जाए। इसी प्रस्ताव के सभी पहलुओं की जांच और व्यवहारिक रास्ता तलाशने के लिए मंत्रिमंडलीय उपसमिति का गठन किया गया है। बैठक में वित्त सचिव समेत संबंधित अधिकारियों के साथ इस बात पर विचार किया गया कि यदि कनिष्ठ अभियंताओं को यह वित्तीय लाभ दिया जाता है तो इसे लागू करने की प्रक्रिया क्या होगी और मौजूदा नियमों के तहत इसके लिए क्या प्रावधान किए जा सकते हैं। बैठक में केवल कर्मचारियों को वित्तीय लाभ देने की मांग पर ही चर्चा नहीं हुई, बल्कि इससे जुड़े संभावित तकनीकी और वित्तीय पहलुओं को भी खंगाला गया। अधिकारियों के साथ विचार-विमर्श में यह देखा गया कि मौजूदा सेवा नियमों, वेतन संरचना और वित्तीय प्रावधानों के बीच किस तरह सामंजस्य बनाया जा सकता है। इसके साथ ही यदि सरकार ग्रेड-पे 5400 का लाभ देने का निर्णय लेती है तो राज्य के खजाने पर पड़ने वाले अतिरिक्त वित्तीय बोझ का आकलन भी महत्वपूर्ण माना गया। समिति के सामने चुनौती यह है कि कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए ऐसा रास्ता निकाला जाए, जो मौजूदा नियमों और राज्य की वित्तीय स्थिति के अनुरूप भी हो। मंत्रिमंडलीय उपसमिति के सदस्य सौरभ बहुगुणा ने कहा कि अभी प्रकरण पर बातचीत हुई है, लेकिन निर्णय नहीं हो पाया है। अधिकारियों को अगली बैठक में सभी आवश्यक तथ्यों और जानकारी के साथ उपस्थित होने को कहा गया है, ताकि मामले के सभी पहलुओं पर विस्तार से विचार करने के बाद आगे बढ़ा जा सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि समिति को इस मामले में अपनी संस्तुति तैयार कर उसे कैबिनेट के सामने रखना है। अंतिम निर्णय मंत्रिमंडल के स्तर पर ही होगा। ऐसे में फिलहाल 2014 के बाद नियुक्त और 10 वर्ष की सेवा पूरी कर चुके कनिष्ठ अभियंताओं को ग्रेड-पे 5400 का लाभ मिलने की स्थिति स्पष्ट नहीं हुई है। यदि तकनीकी अड़चनों का समाधान निकलता है और वित्तीय बोझ को लेकर सहमति बनती है, तो ऐसे कर्मचारियों के लिए लाभ का रास्ता खुल सकता है। हालांकि इसके लिए पहले मंत्रिमंडलीय उपसमिति की संस्तुति और उसके बाद कैबिनेट की मंजूरी जरूरी होगी। फिलहाल कनिष्ठ अभियंताओं की नजर समिति की अगली बैठक और उसमें होने वाली चर्चा पर टिकी है।