पलामू। भारत निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के आलोक में पलामू जिले में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत एन्यूमरेशन यानी गणना चरण का शंखनाद मंगलवार से हो गया है। जिला प्रशासन के सामने इस बार सबसे बड़ी चुनौती उन मतदाताओं को चुनावी मुख्यधारा से जोड़ने की है, जो अब तक 'अनमैप्ड' (अचिन्हित) रह गए हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, पलामू जिले के कुल 17,64,947 मतदाताओं में से 2,35,701 मतदाता अभी भी अनमैप्ड श्रेणी में हैं।
हैरान करने वाली बात यह है कि अनमैप्ड मतदाताओं की सबसे बड़ी संख्या उन क्षेत्रों में है, जो लंबे समय तक उग्रवाद और नक्सलवाद से प्रभावित रहे हैं। इसमें डालटनगंज और छत्तरपुर विधानसभा क्षेत्र शीर्ष पर हैं। डालटनगंज विधानसभा क्षेत्र में कुल 4,06,932 वोटरों में से 67,194 मतदाता अनमैप्ड हैं। इस क्षेत्र के अंतर्गत गढ़वा जिले का भंडरिया इलाका भी आता है, जहां कभी नक्सलियों का गढ़ माना जाने वाला 'बूढ़ापहाड़' स्थित है। ठीक इसी तरह, बिहार सीमा से सटा छत्तरपुर विधानसभा क्षेत्र भी अति-नक्सल प्रभावित रहा है, जहां वर्तमान में पलामू जिले के भीतर सबसे अधिक पुलिस बल की तैनाती है। छत्तरपुर में 43,427 मतदाता अनमैप्ड पाए गए हैं। इन बीहड़ और संवेदनशील इलाकों में हर एक योग्य नागरिक का नाम वोटर लिस्ट में शामिल करना प्रशासन के लिए बड़ी परीक्षा है। पलामू के जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह उपायुक्त दिलीप प्रताप सिंह शेखावत ने स्पष्ट किया है कि प्रशासन इस गणना चरण को एक प्रशासनिक दायित्व नहीं, बल्कि एक 'उत्सव' के रूप में ले रहा है। उन्होंने कहा कि अनमैप्ड वोटरों की पूरी सूची बूथ लेवल अधिकारियों से लेकर तमाम हितधारकों को उपलब्ध करा दी गई है, ताकि पिछले अभियानों की कमियों को दूर कर शत-प्रतिशत मैपिंग सुनिश्चित की जा सके। प्रशासन का लक्ष्य है कि पूरे जिले में जागरूकता का ऐसा माहौल बने जिससे मतदाता के साथ-साथ पूरा समाज इस लोकतांत्रिक महापर्व का हिस्सा बने। इसके लिए बीएलओ घर-घर जाकर सर्वे कर रहे हैं। नागरिकता और पहचान साबित करने के लिए भारत निर्वाचन आयोग द्वारा मान्यता प्राप्त 11 तरह के दस्तावेज (जैसे राशन कार्ड, आधिकारिक पहचान पत्र आदि) मान्य होंगे, जिनके आधार पर बीएलओ तुरंत मैपिंग की प्रक्रिया पूरी करेंगे।