Jul 14, 2026

सत्यापन में 108 संदिग्ध शस्त्र लाइसेंस चिन्हित

post-img

रुद्रपुर। ऊधम सिंह नगर जनपद में संदिग्ध और बाहरी राज्यों से जारी किए गए शस्त्र लाइसेंसों के खिलाफ पुलिस ने अब तक का सबसे बड़ा सत्यापन अभियान चलाया है। एसएसपी अजय गणपति के निर्देशन में जिलेभर में चले अभियान के तहत अब तक 108 संदिग्ध शस्त्र लाइसेंस चिन्हित किए गए हैं। इनमें से 94 लाइसेंस पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिए हैं, जबकि 119 हथियार संबंधित थानों में जमा कराए गए हैं। पुलिस का कहना है कि अभियान अभी जारी है और संदिग्ध लाइसेंसों की वैधानिकता की गहन जांच की जा रही है। पूरे अभियान की शुरुआत 11 जून 2026 को कोतवाली कुंडा में दर्ज एक मुकदमे से हुई। पुलिस ने एफआईआर संख्या 150/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं तथा शस्त्र अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया था। इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से चार हथियार और दो फर्जी शस्त्र लाइसेंस बरामद किए गए थे। विवेचना के दौरान पुलिस के सामने यह तथ्य आया कि ऊधम सिंह नगर में बड़ी संख्या में ऐसे लोग हथियार रखे हुए हैं, जिन्होंने बाहरी राज्यों या अन्य जनपदों से जारी शस्त्र लाइसेंसों के आधार पर हथियार खरीदे और उपयोग में लिए हैं। इन लाइसेंसों की वैधता संदिग्ध प्रतीत होने पर एसएसपी अजय गणपति ने पूरे जिले में व्यापक सत्यापन अभियान शुरू करने के निर्देश दिए। 25 जून 2026 को एसएसपी अजय गणपति ने जिलेभर में बाहरी राज्यों एवं गैर जनपदों से जारी शस्त्र लाइसेंसों की जांच के लिए तीन विशेष पुलिस टीमों का गठन किया। इन टीमों ने सभी थाना क्षेत्रों में जाकर दस्तावेजों का सत्यापन, हथियारों का भौतिक निरीक्षण तथा लाइसेंसों की वैधानिक जांच शुरू की। पुलिस के अनुसार सत्यापन के लिए कुल 678 शस्त्र लाइसेंस चिन्हित किए गए, जिनमें से अब तक 626 लाइसेंसों का सत्यापन पूरा कर लिया गया है। अभी 52 लाइसेंसों का सत्यापन शेष है। अभियान के दौरान पुलिस ने 108 शस्त्र लाइसेंसों को संदिग्ध पाया है। इनमें से 94 लाइसेंस पुलिस ने कब्जे में ले लिए, जबकि 119 हथियार संबंधित थानों में जमा कराए गए हैं। अब इन सभी मामलों में लाइसेंस जारी होने की प्रक्रिया, संबंधित दस्तावेजों और वैधानिकता की विस्तार से जांच की जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जिन शस्त्र लाइसेंसों की वैधता संदिग्ध पाई गई है, उनके निर्गमन की पूरी प्रक्रिया की जांच की जा रही है। यह भी देखा जा रहा है कि कहीं फर्जी दस्तावेजों या नियमों की अनदेखी कर तो लाइसेंस जारी नहीं किए गए। यदि जांच में अनियमितता या फर्जीवाड़ा सामने आता है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।