Mar 05, 2026

उत्तराखंड में बर्फीले और मैदानी क्षेत्रों की अलग-अलग जनगणना

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देहरादून। केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से जनगणना की अधिसूचना जारी होते ही उत्तराखंड में प्रशासनिक और भौगोलिक सीमाएं सील कर दी गई हैं। अब जनगणना प्रक्रिया पूरी होने तक किसी भी जिले, तहसील, नगर निकाय, पंचायत या वार्ड की सीमाओं में कोई बदलाव नहीं किया जा सकेगा। सरकार न तो नए नगर निगम, नगर पालिका या नगर पंचायत का गठन कर सकेगी और न ही किसी गांव को नगर निकाय में शामिल किया जा सकेगा। अधिसूचना के अनुसार, जनगणना का पहला चरण 25 अप्रैल 2026 से शुरू होगा, जिसके तहत 24 मई 2026 तक मकान सूचीकरण और मकान गणना का कार्य किया जाएगा। इसके बाद दूसरा चरण 11 से 30 सितंबर 2026 के बीच प्रदेश के बर्फबारी वाले क्षेत्रों में संचालित होगा। इन इलाकों में सर्दियों के दौरान पलायन की स्थिति को देखते हुए लोगों की गणना पहले की जाएगी। तीसरे चरण में 9 से 28 फरवरी 2027 तक राज्य के अन्य क्षेत्रों में देशभर के साथ जनगणना संपन्न होगी।

जनगणना के दौरान सीमाओं को स्थिर रखना अनिवार्य माना गया है, ताकि जनसंख्या संबंधी आंकड़ों में किसी प्रकार का भ्रम या त्रुटि न हो। यदि बीच में प्रशासनिक सीमाएं बदली जाती हैं तो आंकड़ों में मिसमैच की आशंका बढ़ सकती है। हालांकि, इस निर्णय का सार्वजनिक सुविधाओं या सामान्य सरकारी कामकाज पर कोई असर नहीं पड़ेगा। तैयारियों के तहत 16 फरवरी से चार्ज अधिकारियों का प्रशिक्षण शुरू किया जा रहा है। 23 कर्मचारियों को मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा। इसके बाद 555 कर्मचारियों को फील्ड ट्रेनर बनाया जाएगा, जो 4,000 सुपरवाइजर और लगभग 30 हजार कर्मचारियों को प्रशिक्षण देंगे। 25 मार्च से 7 अप्रैल के बीच बड़े पैमाने पर प्रशिक्षण सत्र आयोजित होंगे, जिनमें प्रत्येक बैच में 40 कर्मचारियों को तीन दिन का प्रशिक्षण दिया जाएगा। जनगणना कार्य निदेशालय की निदेशक ईवा आशीष श्रीवास्तव के अनुसार, अधिसूचना के साथ ही सीमाएं सील हो चुकी हैं और जनगणना पूर्ण होने तक यह व्यवस्था लागू रहेगी। राज्य में व्यापक स्तर पर तैयारियां शुरू हो चुकी हैं।