Mar 22, 2026

पहाड़ों में सुरक्षित रहने के उपाय: एवलॉन्च के जोखिम को कम करने के लिए प्रशासन ने बताए जरूरी कदम

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देहरादून।उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में मौसम के तेज बदलाव ने एक बार फिर खतरे की घंटी बजा दी है। पिछले कुछ दिनों से हो रही बारिश और बर्फबारी के बीच अब हिमस्खलन (एवलॉन्च) का जोखिम बढ़ गया है। रक्षा भू-सूचना विज्ञान अनुसंधान प्रतिष्ठान (डीजीआरई), चंडीगढ़ ने राज्य के तीन प्रमुख जिलोंउत्तरकाशी, चमोली और पिथौरागढ़ के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। यह अलर्ट 20 मार्च शाम 5 बजे से 21 मार्च शाम 5 बजे तक प्रभावी रहा, लेकिन मौसम की स्थिति को देखते हुए सतर्कता बरतने की सलाह जारी है। राज्य आपदा प्रबंधन विभाग ने भी एडवाइजरी जारी कर लोगों और प्रशासन को अलर्ट मोड पर रखा है। डीजीआरई  के बुलेटिन के अनुसार, इन तीन जिलों को डेंजर लेवल-3 (ऑरेंज) में रखा गया है, जो मध्यम से उच्च जोखिम वाली श्रेणी है। यहां 2700 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में गहरी और अस्थिर बर्फ की परत बनने से प्राकृतिक हिमस्खलन की संभावना बढ़ गई है। ऐसे में घाटियों तक पहुंचने वाले एवलॉन्च का खतरा बना हुआ है। इसके अलावा रुद्रप्रयाग और बागेश्वर जिलों में डेंजर लेवल-1 (चेतावनी स्तर) जारी किया गया है, जहां जोखिम अपेक्षाकृत कम लेकिन सावधानी जरूरी है।

मौसम विभाग के अनुसार, राज्य में बदलते मौसम पैटर्न के कारण नई बर्फबारी पुरानी जमी बर्फ के साथ असंतुलन पैदा कर रही है, जो एवलॉन्च का प्रमुख कारण बनता है। उच्च हिमालयी इलाकों में लगातार बर्फबारी से सड़कें, ट्रेकिंग रूट और गांव प्रभावित हो सकते हैं। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (एसईओसी) ने जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे दिन-रात निगरानी रखें, खासकर उन क्षेत्रों में जहां पहले भी एवलॉन्च की घटनाएं हो चुकी हैं। एडवाइजरी में आम लोगों के लिए कई महत्वपूर्ण सावधानियां बताई गई हैं। बर्फीले इलाकों में अनावश्यक आवाजाही से बचें, यदि जरूरी न हो तो घर से बाहर न निकलें। यात्रा करते समय पूरी सतर्कता बरतें और फिसलन वाले रास्तों पर विशेष एहतियात रखें। घरों और गौशालाओं की छतों पर ज्यादा बर्फ जमा न होने दें, क्योंकि अतिरिक्त भार से दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है। 2700 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सलाह दी गई है कि अगले कुछ दिनों के लिए निचले इलाकों में शिफ्ट हो जाएं। ट्रेकर्स और पर्यटकों को पुराने एवलॉन्च जोन से दूर रहने की सख्त हिदायत है, क्योंकि इन क्षेत्रों में दोबारा हिमस्खलन की आशंका ज्यादा रहती है। यह अलर्ट केवल उत्तराखंड तक सीमित नहीं है। डीजीआरई ने हिमालयी क्षेत्र के अन्य राज्यों जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और सिक्किम में भी समान चेतावनियां जारी की हैं। जलवायु परिवर्तन और असामान्य मौसम पैटर्न के कारण पूरे हिमालय में एवलॉन्च की घटनाओं में वृद्धि देखी जा रही है। उत्तराखंड में पर्यटन और ट्रेकिंग गतिविधियां चरम पर होती हैं, इसलिए इस अलर्ट का सख्ती से पालन जरूरी है। प्रशासन सक्रिय है और लगातार हालात पर नजर रख रहा है। कोई बड़ी घटना होने पर तुरंत राहत कार्य शुरू करने के लिए टीमें तैयार रखी गई हैं। लोगों से अपील है कि सोशल मीडिया या अफवाहों पर भरोसा न करें, बल्कि आधिकारिक स्रोतों से जानकारी लें और सुरक्षित रहें। यदि नियमों का पालन किया जाए तो इस संवेदनशील मौसम में जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।