Feb 20, 2026

धौलास भूमि विवाद में नोटिस को चुनौती देंगे 161, पूर्व सैनिक भी शामिल

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देहरादून। धौलास जमीन प्रकरण ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है। विकासनगर कोर्ट द्वारा विवादित भूमि से जुड़े सभी 161 खाताधारकों को संयुक्त नोटिस जारी किए जाने के बाद भू-स्वामियों में रोष व्याप्त है। नोटिस में 27 फरवरी को अदालत में उपस्थित होकर अपने भूमि संबंधी दस्तावेज और साक्ष्य प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। दूसरी ओर, सभी खाताधारकों ने एकजुट होकर कानूनी लड़ाई लड़ने की घोषणा की है।विवादित भूमि के वर्तमान स्वामियों का कहना है कि जिला प्रशासन की कार्रवाई उनके साथ अन्याय है। उनका आरोप है कि यह पूरा मामला राजनीतिक रंग ले चुका है और एक विशेष समुदाय से जोड़कर प्रस्तुत किया जा रहा है, जबकि अधिकांश भूमि धारक स्थानीय निवासी, पर्वतीय मूल के लोग, पूर्व सैनिक और वरिष्ठ नागरिक हैं।

भारतीय सेना के पूर्व सैनिक रवि (परिवर्तित नाम) ने बताया कि उन्होंने सेना में दो अलग-अलग कार्यकाल मिलाकर 38 वर्ष सेवा दी है। अपनी मेहनत की कमाई और जीवनभर की बचत से उन्होंने धौलास क्षेत्र में लगभग 200 गज जमीन अपने बच्चों के भविष्य के लिए खरीदी थी। उनका कहना है कि जमीन की खरीद-फरोख्त जिला प्रशासन की निगरानी और अधिकृत प्रक्रिया के तहत हुई थी। रजिस्ट्री से लेकर म्यूटेशन तक सभी दस्तावेज विधिवत तैयार किए गए हैं। अब अचानक नोटिस जारी कर उन्हें कटघरे में खड़ा किया जा रहा है। एक अन्य भू-स्वामी गौरव ढौंडियाल ने भी प्रशासनिक प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि जमीन खरीदने से पहले उन्होंने रजिस्ट्रार कार्यालय, पटवारी, तहसीलदार और एसडीएम स्तर तक सभी औपचारिकताएं पूरी कीं। विभागीय अनुमति और जांच के बाद ही जमीन की रजिस्ट्री कराई गई। उनका कहना है कि हाईकोर्ट से कृषि भूमि के रूप में बिक्री की अनुमति प्राप्त होने के बाद ही यह जमीन खरीदी गई थी। गौरव ढौंडियाल ने आरोप लगाया कि अब इस मामले को सांप्रदायिक रंग देकर अनावश्यक विवाद खड़ा किया जा रहा है। उनका कहना है कि भू-स्वामियों में किसी विशेष समुदाय के लोग नहीं हैं, और यदि होते भी तो कानून सबके लिए समान है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यहां किसी प्रकार का शैक्षणिक या धार्मिक संस्थान स्थापित करने की योजना नहीं है, फिर भी इसे हिंदू-मुस्लिम मुद्दे के रूप में पेश किया जा रहा है। भू-स्वामियों का आरोप है कि आगामी 2027 विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए इस मुद्दे को राजनीतिक रूप दिया जा रहा है। उनका कहना है कि सरकार आम नागरिकों की मेहनत की कमाई से खरीदी गई संपत्ति को विवादित बताकर दबाव बना रही है। विकासनगर कोर्ट के नोटिस के बाद सभी 161 खाताधारकों ने एक मंच पर आकर सामूहिक रूप से कानूनी लड़ाई लड़ने का निर्णय लिया है। सेना से सेवानिवृत्त मनबर सिंह रावत ने भी इस कार्रवाई को राजनीति से प्रेरित बताया। उन्होंने कहा कि धौलास भूमि प्रकरण में करीब 40 पूर्व सैनिकों ने जमीन खरीदी है, जिन्होंने वैधानिक प्रक्रिया के तहत रजिस्ट्री और म्यूटेशन कराया। उनका कहना है कि यदि खरीद प्रक्रिया में कोई त्रुटि थी तो उसकी जिम्मेदारी संबंधित विभागों की बनती है, न कि आम नागरिकों की। अब उन्हीं लोगों को नोटिस देकर परेशान किया जा रहा है, जिन्होंने सरकारी प्रक्रिया का पालन किया। भू-स्वामियों ने कहा कि वे अदालत में सभी आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करेंगे और कानूनी रूप से अपने अधिकारों की रक्षा करेंगे। उनका कहना है कि प्रशासन द्वारा जारी सभी प्रमाणपत्र, रजिस्ट्री दस्तावेज और म्यूटेशन रिकॉर्ड उनके पास सुरक्षित हैं। वे न्यायपालिका पर विश्वास जताते हुए निष्पक्ष सुनवाई की उम्मीद कर रहे हैं। धौलास जमीन विवाद अब केवल कानूनी मामला नहीं रह गया है, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। एक ओर प्रशासन अपनी कार्रवाई को वैधानिक प्रक्रिया का हिस्सा बता रहा है, तो दूसरी ओर भू-स्वामी इसे अन्यायपूर्ण कदम करार दे रहे हैं। आगामी 27 फरवरी को विकासनगर कोर्ट में होने वाली सुनवाई इस प्रकरण की दिशा तय करेगी। फिलहाल, सभी 161 खाताधारक एकजुट होकर न्याय की लड़ाई लड़ने की तैयारी में जुटे हैं।
 

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